फगवाड़ा ( डॉ रमन ) भारतीय समाज और संस्कृति में शताब्दियों ही नहीं बल्कि युग युगांतर से किन्नर समुदाय का विशेष महत्व रहा है। परन्तु आधुकिन काल में किन्नरों की पहचान सिर्फ विवाह अथवा औलाद के जन्म पर बधाई लेने तक सीमित होकर रह गई है। इस पारंपरिक मान्यता को तोडऩे का काम महंत लता शेरगिल ने बखूबी किया है। लता शेरगिल जो कि इंटरनेशनल ह्यूमन राइटस कौंसिल कपूरथला की प्रधान भी हैं उन्होंने गाँव चैड़ के एक जरूरतमंद परिवार को लडक़ी के विवाह पर बहुमुल्य सहयोग कर मिसाल पैदा की है। महंत लता शेरगिल के प्रयास की सराहना करते हुए गाँव चैड़ की सरपंच बीबी कमलजीत कौर और पंचायत सदस्यों ने कहा कि लता शेरगिल एक नेक आत्मा हैं जो काफी लम्बे समय से समाज सेवा के कामों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा डाल रही हैं। महंत लता शेरगिल ने कहा कि बेशक उनका पेशा रिवायती है परन्तु हर मनुष्य का फर्ज है कि अपनी सामथ्र्य अनुसार समाज की सेवा में योगदान डाले। कोविड-19 कोरोना महामारी के इस आपदा काल में आर्थिक पक्ष से कमजोर वर्ग के लोग बहुत मुश्किल में जीवन बसर कर रहे हैं। ऐसे ही एक परिवार की सहायता करने का सौभाग्य उन्हें मिला जिसके लिए वह परमात्मा की शुक्रगुजार हैं। महंत लता शेरगिल ने कहा कि लड़कियों को बोझ नहीं समझना चाहिए क्योंकि उन्हें लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है। वे अपना मुकद्दर लेकर आती हैं। मनुष्य तो सिर्फ एक जरीया ही बनता है। इस अवसर पर प्रकाश दास, कपूर कौर, मनजीत कौर, रमनदीप कौर, लखविन्द्र कौर, बलविन्दर कौर, बलवीर कौर, सत्ता बनिंग चाचोकी, पिन्दी मल्ल कट्टां, पूरन कौर, सत्या देवी व हरबंस कौर आदि उपस्थित थे।